बिहार बोर्ड कक्षा 10 वी भूगोल - अध्याय 1(C): वन एवं वन्य प्राणी संसाधन के Handwritten नोट्स
वन एवं वन्य प्राणी संसाधन" अध्याय भारत में वनों और वन्य जीवों के महत्व और उनके संरक्षण पर आधारित है। यह अध्याय वनों के प्रकार, उनके उपयोग, वन्य जीवों की जैव विविधता, और इन संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को समझाने पर केंद्रित है। इसमें वनों के अति दोहन और वन्य जीवों के घटते आवास पर भी चर्चा की गई है।
प्रमुख विषय:
वन संसाधन:
- भारत में वनों के प्रकार: उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, शुष्क पर्णपाती वन, और पर्वतीय वन।
- वनों का महत्व: जलवायु संतुलन, मिट्टी का संरक्षण, और औद्योगिक उपयोग।
वन्य प्राणी संसाधन:
- भारत की जैव विविधता: बाघ, हाथी, गैंडा, और अन्य विलुप्तप्राय प्रजातियाँ।
- वन्य प्राणियों का पारिस्थितिकीय महत्व।
वनों और वन्य जीवों पर संकट:
- वनों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव।
- शिकार और अवैध व्यापार।
- औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से वन्य जीव आवास का नुकसान।
संरक्षण और प्रबंधन:
- वनीकरण और वृक्षारोपण।
- राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य: कान्हा, कार्बेट, सुंदरबन।
- जैव विविधता संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास।
सरकार की पहल:
- भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972।
- वनों के लिए संयुक्त प्रबंधन कार्यक्रम (JFM)।
- संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु:
- भारत में वनों के प्रकार और उनका वितरण।
- वन्य प्राणियों का महत्व और संकट।
- संरक्षण के उपाय: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयास।
- वनों और वन्य प्राणियों पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव।
निष्कर्ष:
यह अध्याय स्पष्ट करता है कि वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह मानव अस्तित्व और विकास के लिए भी अनिवार्य है। सामूहिक प्रयास और सतत विकास की दिशा में कदम ही इन संसाधनों को सुरक्षित रख सकते हैं।