बिहार बोर्ड कक्षा 10 वी विज्ञान - अध्याय 16: प्राकृतिक संसाधनो का संपोषित प्रबंधन की NCERT Book
'प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन' अध्याय में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व, उनके संरक्षण और सतत् (संपोषित) प्रबंधन पर जोर दिया जाता है। यह अध्याय समझाता है कि कैसे हमें सीमित प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखना चाहिए।
मुख्य बिंदु
प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)
- प्राकृतिक संसाधन वे तत्व होते हैं जिन्हें पृथ्वी से प्राप्त किया जाता है और जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक होते हैं।
- ये संसाधन दो प्रकार के होते हैं:
- नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources): वे संसाधन जो प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा।
- गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources): वे संसाधन जो सीमित होते हैं और उनका पुनः निर्माण नहीं हो सकता, जैसे कोयला, तेल, और प्राकृतिक गैस।
संपोषित प्रबंधन (Sustainable Management)
- संपोषित प्रबंधन का मतलब है कि संसाधनों का ऐसा उपयोग किया जाए कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनका इस्तेमाल कर सकें।
- यह प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और उनके संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया है।
- इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखना और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से जीना है।
प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग (Overuse of Natural Resources)
- प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक और असमझदारी से उपयोग प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनस्पति और जीवों की विलुप्ति का कारण बन सकता है।
- उदाहरण: जल संकट, वनों की कटाई, खनिजों का अत्यधिक खनन।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय
- ऊर्जा का बचत
- ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए ऊर्जा कुशल उपकरणों का उपयोग करें।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन) का अधिकतम उपयोग करें।
- जल संरक्षण
- वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग।
- वनों की रक्षा
- वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकने और पुनः वनीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा देना।
- कचरे का पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग
- पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और कचरे का सही तरीके से निपटान।
- स्थिर कृषि पद्धतियाँ (Sustainable Agriculture)
- जैविक खेती, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के कम प्रयोग से कृषि की स्थिरता।
- संवेदनशीलता और जागरूकता
- लोगों में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना और उनके संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना।
संपोषित विकास (Sustainable Development)
- संपोषित विकास का उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक समृद्धि और पर्यावरणीय संरक्षण को संतुलित करना है।
- इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करना शामिल है कि आने वाली पीढ़ियों को नुकसान न हो और वे भी इनका उपयोग कर सकें।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहल
- विभिन्न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा पर्यावरण और संसाधन संरक्षण के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं।
- उदाहरण: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता, रियो सम्मेलन, और राष्ट्रीय नीतियाँ जैसे राष्ट्रीय जल नीति, राष्ट्रीय वन नीति।
निष्कर्ष
'प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन' हमें यह समझाता है कि हमारे द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किस तरह किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में हमारे संसाधन समाप्त न हो जाएं और पर्यावरण पर उनका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
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