बिहार बोर्ड कक्षा 10 वी सामाजिक विज्ञान -इतिहास- अध्याय 5: अर्थव्यवस्था और आजीविका की NCERT Book
"अर्थव्यवस्था और आजीविका" विषय भारतीय समाज के आर्थिक ढांचे और लोगों की जीवनशैली से संबंधित है। इसमें कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, और उनके बीच के संबंधों का विश्लेषण किया जाता है। साथ ही, यह विषय यह भी समझाता है कि किस प्रकार आर्थिक गतिविधियाँ और आजीविका के साधन सामाजिक संरचना, विकास और असमानताओं को प्रभावित करते हैं।
मुख्य बिंदु
अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र
- कृषि: भारत की पारंपरिक अर्थव्यवस्था में कृषि सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र था, जिसमें अधिकांश लोग आजीविका प्राप्त करते थे।
- उद्योग: औद्योगिक क्रांति के बाद, विशेष रूप से वस्त्र उद्योग, और फिर छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों का विकास हुआ।
- सेवा क्षेत्र: सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, और पर्यटन जैसे सेवा क्षेत्र में वृद्धि ने आधुनिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कृषि और ग्रामीण आजीविका
- अधिकांश भारतीय आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और उनकी आजीविका कृषि पर निर्भर है।
- कृषि उत्पादन, सिंचाई, और उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग आजीविका के मुख्य स्रोत बने।
औद्योगिकीकरण और शहरीकरण
- औद्योगिकीकरण ने शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए, जिससे श्रमिक वर्ग का विकास हुआ।
- शहरीकरण से आजीविका के नए रूपों का उदय हुआ जैसे कि व्यापार, सेवाएँ, और छोटे उद्योग।
आधुनिक अर्थव्यवस्था और वैश्वीकरण
- वैश्वीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा।
- यह परिवर्तन विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसरों का सृजन करता है, लेकिन साथ ही असमानता और संघर्ष को भी बढ़ावा देता है।
आज की चुनौतियाँ
- बेरोज़गारी, कृषकों की आत्महत्याएँ, असमानता, और शहरी-ग्रामीण विभाजन जैसी समस्याएँ आजीविका के संदर्भ में प्रमुख चुनौती बनी हुई हैं।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्य के अवसरों में असमानता आर्थिक असमानताओं को बढ़ाती है।
सरकारी योजनाएँ और नीतियाँ
- भारत सरकार ने गरीबों की आजीविका सुधारने के लिए कई योजनाएँ बनाई हैं, जैसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA), और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ।
- इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में स्थायी रोजगार सृजित करना है।
निष्कर्ष
"अर्थव्यवस्था और आजीविका" अध्याय हमें भारतीय समाज की बदलती आर्थिक स्थिति और रोजगार के अवसरों के बारे में समझने में मदद करता है। यह विषय सामाजिक असमानताओं और आर्थिक विकास की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का भी विश्लेषण करता है, जिससे एक समृद्ध और समतामूलक समाज की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।