बिहार बोर्ड कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 10 s-ब्लॉक तत्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
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बिहार बोर्ड कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 10 s-ब्लॉक तत्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न:1 क्षारीय मृदा धातुओं की रासायनिक अभिक्रियाशीलता का वर्णन कीजिए।

उत्तर: क्षारीय मृदा धातुएँ बहुत अभिक्रियाशील हैं, परन्तु ये क्षार धातुओं से कम क्रियाशील हैं। इनकी सक्रियता धन विद्युत प्रकृति बढ़ने के साथ बढ़ती है (Be → Ra) वायु में रखने पर इनकी धात्विक चमक मलिन हो जाती है, क्योकि धातु की सतह पर ऑक्साइड की परत बन जाती है। इन तत्वों में बेरिलियमें सबसे कम क्रियाशील है। परमाणु त्रिज्या छोटी और ऊर्ध्वपातन ऊर्जा व आयनन ऊर्जा • अपेक्षाकृत ऊँची होने के कारण बेरिलियम अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से गुणों में भिन्नता प्रदर्शित करता है।

क्षारीय मृदा धातु (M) ऑक्सीजन के साथ ऑक्साइड (MO), नाइट्रोजन के साथ नाइट्राइड (M3N2), हाइड्रोजन के साथ हाइड्राइड (MH2) और हैलोजनों के साथ हैलाइड (MX2) बनाते हैं। बेरिलियम हाइड्रोजन से सीधी अभिक्रिया नहीं करता है।

बेरिलियम को छोड़कर अन्य सभी क्षारीय मृदा धातु जल से क्रिया करते हैं। मैग्नीशियम उच्च ताप पर जल (भाप) से क्रिया करता है, क्योंकि मैग्नीशियम के पृष्ठ पर ऑक्साइड की परत जमी होती है।

M + 2H2O → M(OH)2 + H2

क्षारीय मृदा धातु (M) अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करते हैं। बेरिलियम अम्लों और क्षारकों दोनों से हाइड्रोजन विस्थापित करता है।

M + H2SO4 → MSO4 + H2

प्रश्न:2 बेरिलियम के असंगत गुणों का वर्णन कीजिए।

उत्तरक: बेरिलियम की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अन्य क्षारीय मृदा धातुओं की त्रिज्याओं के अपेक्षाकृत बहुत छोटी होने के कारण बेरिलियम अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से गुणों में भिन्नता प्रदर्शित करता है। बेरिलियम के कुछ असंगत गुण  निम्नलिखित हैं-

बेरिलियम जल से अभिक्रिया नहीं करता है। अन्य सभी क्षारीय मृदा धातुएँ जल से अभिक्रिया करती हैं।

बेरिलियम हाइड्रोजन से सीधी अभिक्रिया नहीं करता है। अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ हाइड्रोजन से सीधी अभिक्रिया करती हैं।

बेरिलियम उभयधर्मी (amphoteric) धातु है। बेरिलियम प्रबल क्षारों और अम्लों दोनों के विलयनों से अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन विस्थापित करता है। अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ केवल अम्लों से अभिक्रिया करती हैं।

Be + 2NaOH + 2H2O → Na2[Be(OH)4] + H2

Be + H2SO4 → BeSO4 + H2

बेरिलियम आयन, Be2+, का आवेश/त्रिज्या अनुपात उच्च होने के कारण बेरिलियम की ध्रुवण क्षमता (polarising Power) अन्य क्षारीय मृदा धातु आयनों की अपेक्षा उच्च होती है, अत: बेरिलियम की सहसंयोजक बन्ध बनाने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक होती है। बेरिलियम के यौगिकों में सहसंयोजक लक्षण की प्रधानता होती है। अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिक मुख्यत: आयनिक होते हैं।

प्रश्न:3  क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।

उत्तर: वर्ग 2 के तत्व: क्षारीय मृदा धातुएँ आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्वं हैं-बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्सियम (Ca), स्ट्रॉन्शियम (Sr), बेरियम (Ba) एवं रेडियम (Ra)। बेरिलियम के अतिरिक्त अन्य तत्व संयुक्त रूप से ‘मृदा धातुएँ’ कहलाती हैं। प्रथम तत्व बेरिलियम वर्ग के अन्य तत्वों से भिन्नता दर्शाता है एवं ऐलुमिनियम के साथ विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है। वर्ग का अन्तिम तत्व रेडियम रेडियोऐक्टिव प्रकृति का है। इन तत्वों को विशिष्ट नाम निम्नलिखित कारणों से दिया जाता है-

इन तत्वों के ऑक्साइड क्षार धातुओं के समान जल में घुलकर हाइड्रॉक्साइड अथवा क्षार बनाते हैं।

प्रश्न:4 विद्युत ऋणात्मकता क्या है?

उत्तर:–किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता इसके परमाणु की इलेक्ट्रॉनों (बन्ध के साझे युग्म के लिए) को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को कहते हैं। क्षार धातुओं की विद्युत ऋणात्मकता कम होती है जिसका अर्थ है कि इनकी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की क्षमता कम होती है। विद्युत ऋणात्मकता के मान वर्ग में नीचे जाने पर घटते हैं।

क्षार धातु परमाणुओं का ns1 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है जिसका अर्थ है कि इनको प्रवृत्ति इलेक्ट्रॉन त्यागने की होती है न कि ग्रहण करने की। अतः इनकी विद्युत ऋणात्मकता के मान कम होते हैं। चूंकि वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ते हैं; अतः परमाणु की संयोजी इलेक्ट्रॉन को थामे रखने की क्षमता में क्रमिक कमी आती है। इसलिए वर्ग में नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है।

प्रश्न:5 ऑक्सीकरण-अवस्था एवं धन विद्युती मे क्या अंतर है? 

उत्तर: ऑक्सीकरण-अवस्था एवं धन विद्युती गुण– क्षार धातु परिवार के सभी सदस्य अपने यौगिकों में +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं तथा प्रबल धन विद्युती होते हैं। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धन विद्युती गुण बढ़ता है। क्षार धातुओ की आयनन एन्थेपी के भान बहुत कम होने के कारण इनके परमाणुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉन खोकर एकल संयोजी धनायन बनाने की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है। परिमाणस्वरूप एन्थैल्पी का मान घटता है; अत: धन विद्युती गुण बढ़ता है।

प्रश्न:6 विद्युत ऋणात्मकता क्या है समझाइये l

उत्तर: किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता इसके परमाणु की इलेक्ट्रॉनों (बन्ध के साझे युग्म के लिए) को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को कहते हैं। क्षार धातुओं की विद्युत ऋणात्मकता कम होती है जिसका अर्थ है कि इनकी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की क्षमता कम होती है। विद्युत ऋणात्मकता के मान वर्ग में नीचे जाने पर घटते हैं।

क्षार धातु परमाणुओं का ns1 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है जिसका अर्थ है कि इनको प्रवृत्ति इलेक्ट्रॉन त्यागने की होती है न कि ग्रहण करने की। अतः इनकी विद्युत ऋणात्मकता के मान कम होते हैं। चूंकि वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ते हैं; अतः परमाणु की संयोजी इलेक्ट्रॉन को थामे रखने की क्षमता में क्रमिक कमी आती है। इसलिए वर्ग में नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है।

प्रश्न:7 धात्विक लक्षण क्या है? 

उत्तर: धात्विक लक्षण- वर्ग 1 के तत्व प्रारूपिक धातुएँ हैं तथा अत्यन्त कोमल हैं। इन्हें चाकू द्वारा सरलता से काटा जा सकता है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इनके धात्विक लक्षणों में अत्यधिक वृद्धि होती है।

किसी तत्व का धात्विक गुण उसके इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति से सम्बन्धित होता है। धात्विक बन्ध की प्रबलता इलेक्ट्रॉन समुद्र (electron sea) में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों तथा करनेल (kernal) के मध्य आकर्षण बल पर निर्भर करती है। करनेल का आकार जितना छोटा होगा तथा संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या जितनी अधिक होगी, धात्विक बन्ध उतना ही प्रबल होगा। दूसरे शब्दों में, धातु की कठोरता धात्विक बन्ध के प्रबल होने पर अधिक होगी। क्षार धातुओं में करनेल बड़े आकार के होते हैं तथा इनमें केवल एक संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है। अतः क्षार धातुओं में धात्विक बन्ध दुर्बल होते हैं तथा क्षार धातुएँ कोमल होती हैं। लीथियम सबसे कठोर होता है, चूंकि इसका करनेल सबसे छोटे आकार का होता है।

प्रश्न:8 गलनांक तथा क्वथनांक मे क्या अंतर है? 

उत्तर: गलनांक तथा क्वथनांक- क्षार धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक अत्यन्त कम होते हैं जो वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटते हैं।

क्षार धातुओं के परमाणुओं को आकार ‘अधिक होता है; अतः क्रिस्टल-जालक में इनकी बन्धन ऊर्जा बहुत कम होतो है। परिणामस्वरूप इनके गलनांक कम होते हैं। वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार में वृद्धि के साथ-साथ गलनांक के मान घटते हैं। क्वथनांक कम होने का कारण भी यही होता है।

प्रश्न:9 ज्वाला को बेरिलियम एवं मैग्नीशियम कोई रंग नहीं प्रदान करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ ऐसा करती हैं। क्यों?

उत्तर: Be और Mg की आयनन एन्थैल्पी अधिक होने के कारण इनके संयोजक इलेक्ट्रॉन बहुत मजबूती से बंधे होते हैं। ये बुन्सन ज्वाला की ऊर्जा द्वारा उत्तेजित नहीं होते हैं। इसलिए ये तत्त्व ज्वाला में कोई रंग नहीं देते हैं। अन्य क्षारीय मृदा धातुओं की आयनन एन्थैल्पी कम होती है और इनके संयोजक इलेक्ट्रॉन ज्वाला (flame) द्वारा उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर में चले जाते हैं। इस कारण ये धातुएँ ज्वाला को विशेष रंग प्रदान करती हैं।

प्रश्न:10 सॉल्वे प्रक्रम में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर: सॉल्वे प्रक्रम—साधारणतया सोडियम कार्बोनेट ‘सॉल्वे विधि द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में लाभ यह है कि सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट जो अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट एवं सोडियम क्लोराइड के संयोग से अवक्षेपित होता है, अल्प विलेय होता है। अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट C0, गैस को सोडियम क्लोराइड के अमोनिया से संतृप्त सान्द्र विलयन में प्रवाहित कर बनाया जाता है। वहाँ पहले अमोनियम कार्बोनेट और फिर अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनती है। सम्पूर्ण प्रक्रम की अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

2NH3 +H2O + CO2 → (NH4)2CO

प्रकार सोडियम बाइकार्बोनेट के क्रिस्टल पृथक् हो जाते हैं जिन्हें गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जाता है-

2NaHCO3 → Na2CO3 +CO2 ↑ +H2O

इस प्रक्रम में NH4Cl युक्त विलयन की Ca(OH)2 से अभिक्रिया पर NHS को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। कैल्सियम क्लोराइड सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है

2NH4Cl+Ca(OH)2 → 2NH3 ↑ +CaCl2 +2H2O

प्रश्न:11 Li2CO3 कम ताप पर एवं Na2CO3 उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है?

उत्तर: Li2CO3 कम ताप पर एवं Na2CO3 उच्च ताप पर विघटित होता है। Li2CO3 ऊष्मा के प्रति Na2CO3 से कम स्थायी है क्योंकि Li+ आयन आकार में बहुत छोटा है और यह बड़े ऋणायन को ध्रुवित कर अधिक स्थायी Li2O और CO2 का निर्माण करता है। यही कारण है कि Li2CO3 कम ताप पर विघटित हो जाता है। Na+ आयन आकार में बड़ा होता है और CO2-3 को ध्रुवित करने में असमर्थ है। इसलिएं Na2CO3 उच्च ताप पर स्थिर है।

प्रश्न:12 क्षार धातुओं के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए—

(क) नाइट्रेट

(ख) कार्बोनेट

(ग) सल्फेट।

उत्तर: विलेयता–सभी क्षार धातुओं के नाइट्रेट, कार्बोनेट, सल्फेट जल में घुलनशील हैं और इनकी विलेयता समूह में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है, क्योंकि जलयोजन ऊर्जा (hydration energy) की तुलना में जालक ऊर्जा तेजी से घटती है।

सभी क्षारीय मृदा धातुओं के नाइट्रेट भी जल में घुलनशील हैं, परन्तु इनकी विलेयता समूह में नीचे चलने पर घटती जाती है क्योकि जलयोजन, ऊर्जा जालक ऊर्जा की अपेक्षा तेजी से घटती है। क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट जल में अधिक घुलनशील नहीं हैं और इनकी विलेयता समूह में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है। BeCO3 जल में सूक्ष्म विलेय है और CaCO3 लगभग अविलेय। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर विलेयता घटती है क्योंकि जलयोजन ऊर्जा घटती है। क्षारीय मृदा धातु सल्फेट क्षार धातु सल्फेट से जल में कम विलेय है। इनकी विलेयता समूह में ऊपर से नीचे चलने पर घटती है।

क्षारीय मृदा धातु सल्फेटों की जालक ऊर्जा क्षार धातु सल्फेटों की जालक ऊर्जा से अधिक होती है। यही कारण है कि इनकी विलेयता क्षार धातु सल्फेटों से कम होती है। समूह, में ऊपर से नीचे जाने पर जलयोजन ऊर्जा का मान घटता है परन्तु जालक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसलिए BeSO4 से BaSO4 तक जाने पर विलेयता घटती है।

तापीय स्थायित्व

(क) क्षारीय मृदा धातुओं और क्षार धातुओं के नाइट्रेट गर्म करने पर विघटित हो जाते हैं। क्षार धातु के नाइट्रेट (Li के अतिरिक्त) विघटित होकर धातु नाइट्राइट बनाते हैं।

प्रश्न:13 सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में विलेय हैं, जबकि मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के संगत लवण जल में अल्प विलेय हैं, समझाइए।

उत्तर: सोडियम एवं पोटैशियम आयनों का आकार मैग्नीशियम एवं कैल्सियम आयनों की अपेक्षा बड़ा होता है। बड़े आकार के कारण, सोडियम तथा पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइडों एवं कार्बोनेटों की जालक ऊर्जाओं का मान मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के हाइड्रॉक्साइडों एवं कार्बोनेटों की जालक ऊर्जाओं के मान से बहुत कम है। यही कारण है कि सोडियम तथा पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में आसानी से विलेय हो जाते हैं, जबकि मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में अल्प विलेय हैं।

प्रश्न:14 निम्नलिखित की महत्ता बताइए

(i) चूना पत्थर,

(ii) सीमेण्ट,

(iii) प्लास्टर ऑफ पेरिस।

उत्तर: (i) चूना पत्थर की महत्ता

संगमरमर के रूप में भवन निर्माण में।

बुझे चूने के निर्माण में।

कैल्सियम कार्बोनेट को मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ लोहे जैसी धातुओं के निष्कर्षण में फ्लक्स (flux) के रूप में।

विशेष रूप से अवक्षेपित CaCO3 के प्रयोग से वृहद् रूप में उच्च गुणवत्ता वाले कागज के निर्माण में।

ऐन्टासिड, टूथपेस्ट में अपघर्षक के रूप में, च्यूइंगम के संघटक एवं सौन्दर्य प्रसाधनों में पूरक के रूप में।

(ii) सीमेण्ट की महत्ता

लोहा तथा स्टील के पश्चात् सीमेण्ट ही एक ऐसा पदार्थ है जो किसी राष्ट्र की उपयोगी वस्तुओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका उपयोग कंक्रीट, प्रबलित कंक्रीट, प्लास्टरिंग, पुल निर्माण आदि में किया जाता है।

(iii) प्लास्टर ऑफ पेरिस की महत्ता प्लास्टर ऑफ पेरिस का वृहत्तर उपयोग भवन निर्माण उद्योग के साथ-साथ टूटी हुई हड्डियों के प्लास्टर में भी होता है। इसका उपयोग दन्त-चिकित्सा, अलंकरण-कार्य एवं मूर्तियों तथा अर्द्ध-प्रतिमाओं को बनाने में भी होता है।

प्रश्न:15 लीथियम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातुओं के लवण साधारणतया निर्जलीय होते हैं। क्यों?

उत्तर: सभी क्षार धातु आयनों में Li+ आयन आकार में सबसे छोटा है। अपने छोटे आकार के कारण यह जल अणु को ध्रुवित कर देता है, उससे जुड़ जाता है और अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा आसानी से जलयोजित हो जाता है। इस कारण लीथियम के लवण सामान्यत: जलयोजित होते हैं, जैसे-LiCl.2H2O

प्रश्न:16 LiF जल में लगभग अविलेय होता है, जबकि LiCl न सिर्फ जल में, बल्कि ऐसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए।

उत्तर: LiF की जालक ऊर्जा से अधिक है जिस कारण LiF जल में लगभग अविलेय तथा LiCl जल में विलेय है। इसके अतिरिक्त Cl आयन के F आयन की अपेक्षा आकार में बड़ा होने के कारण LiCl की ध्रुवीकरण की मात्रा LiF की अपेक्षा अधिक होती है। उच्च ध्रुवीकरण की मात्रा के कारण LiCl में सहसंयोजक गुण अधिक होता है। और यह ऐसीटोन में विलेय है।

प्रश्न:17 जैव द्रवों में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम की सार्थकता बताइए।

उत्तर: सोडियम एवं पोटैशियम की जैव द्रवों में सार्थकता 70 किग्रा भार वाले एक सामान्य व्यक्ति में लगभग 90 ग्राम सोडियम एवं 170 ग्राम पोटैशियम होता है, जबकि लोहा केवल 5 ग्राम तथा ताँबा 0:06 ग्राम होता है।

सोडियम आयन मुख्यतः अन्तराकाशीय द्रव में उपस्थित रक्त प्लाज्मा, जो कोशिकाओं को घेरे रहता है, में पाया जाता है। ये आयन शिरा-संकेतों के संचरण में भाग लेते हैं, जो कोशिका झिल्ली में जलप्रवाह को नियमित करते हैं तथा कोशिकाओं में शर्करा और ऐमीनो अम्लों के प्रवाह को भी नियन्त्रित करते हैं। सोडियम एवं पोटैशियम रासायनिक रूप से समान होते हुए भी कोशिका झिल्ली को पार करने की क्षमता एवं एन्जाइम को सक्रिय करने में मात्रात्मक रूप से भिन्न हैं। इसीलिए कोशिकाद्रव्य में पोटैशियम धनायन बहुतायत में होते हैं, जहाँ ये एन्जाइम को सक्रिय करते हैं तथा ग्लूकोस के ऑक्सीकरण से ATP बनने में भाग लेते है।

प्रश्न:18 किंलकर क्या है? इससे सीमेण्ट कैसे बनाया जाता है?

उत्तर: सीमेण्ट के कच्चे पदार्थों से बने मिश्रण को सीमेण्ट की भट्ठी में डालकर गर्म करने के बाद छोटी-छोटी गोलियों के रूप में प्राप्त पदार्थ को किंलकर कहते हैं। क्लिकर; डाइकैल्सियम सिलिकेट, ट्राइकैल्सियम सिलिकेट, ट्राइकैल्सियम ऐलुमिनेट तथा टेट्राकैल्सियम ऐलुमिनोफेराइट का मिश्रण है। क्लिकर में 2-3% जिप्सम मिलाकर इसको पीसकर प्रयोग योग्य सीमेण्ट प्राप्त किया जाता है जिसको पोर्टलैण्ड सीमेण्ट कहते हैं।

प्रश्न:19 सीमेण्ट किंलकर के मुख्य अवयव क्या हैं? इसमें जिप्सम क्यों मिलाया जाता है?

उत्तर: सीमेण्ट किंलकर के मुख्य अवयव निम्नलिखित हैं-

डाइकैल्सियम सिलिकेट (2CaO.SiO2)

ट्राइकैल्सियम सिलिकेट (3CaO.SiO2)

ट्राइकैल्सियम ऐलुमिनेट (3CaO.Al2O3) तथा

टेट्राकैल्सियम ऐलुमिनोफेराइट (4CaO.Al2O2.Fe2O3)

सीमेण्ट किंलकर जल के प्रति अति सुग्राही होता है जिससे यह नमी और जल के सम्पर्क में आकर जम जाता है। इसकी जमने की क्षमता को शिथिल करने के लिए मन्दक पदार्थ मिलाए जाते हैं। जिप्सम एक मन्दक पदार्थ है, जिसके मिलाने से सीमेण्ट क्लिकर के जमने की क्षेमतो मन्द हो जाती है और अधिक जल के सम्पर्क में आने पर ही यह जमता है।

प्रश्न:20 सोडियम बाइकार्बोनेट के विरचन की विधियों एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: सोडियम बाइकार्बोनेट के विरचन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-

सोडियम कार्बोनेट से-सोडियम कार्बोनेट के ठण्डे सान्द्र विलयन में कार्बन डाइऑक्साड गैस प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट सफेद ठोस के रूप में अवक्षेपित हो जाता है। उसे छानकर अलग कर लेते हैं।

अमोनिया-सोडा प्रक्रम( सॉल्वे प्रक्रम) द्वारा–सॉल्वे प्रक्रम द्वारा सोडियम कार्बोनेट का निर्माण करने में पहले सोडियम बाइकार्बोनेट बनता है जिसे अपघटित करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जाता है।

सॉल्वे विधि में अमोनिया द्वारा संतृप्त सान्द्र सोडियम क्लोराइड विलयन की कार्बन डाइऑक्साइड गैस से क्रिया कराने पर सोडियम बाइकार्बोनेट अविलेय ठोस के रूप में पृथक् हो जाता है।

NaCl + NH3 + H2O → NaHCO3 + NH2Cl

सोडियम बाइंकार्बोनेट को छानकर अलग कर लेते हैं। गर्म करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट, सोडियम कार्बोनेट में अपघटित हो जाता है।

प्रश्न:21 चूने के कोई चार औद्योगिक उपयोग लिखिए।

उत्तर: चूने के उपयोग निम्नलिखित हैं

बिल्डिग सामग्री के निर्माण में।

पोर्टलैण्ड सीमेन्ट बनाने में।

आयरन के निष्कर्षण में गालक के रूप में।

जल की अस्थायी कठोरता को दूर करने में।

बुझा चूना, बिना बुझा चूना, दूधिया चूना आदि के निर्माण में।

प्रश्न:22 प्लास्टर ऑफ पेरिस के विरचन की विधि, गुण एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने की विधि

जिप्सम (gypsum) को 150-169°C पर गर्म करने से प्लास्टर ऑफ पेरिस बनता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस के गुण

1. प्लास्टर ऑफ पेरिस सफेद रंग का चूर्ण है जो तेज गर्म करने पर पहले निर्जल CaSO4 के 7-रूप में फिर γ-रूप में बदल जाता है।

बहुत उच्च ताप (1100°C) पर गर्म करने पर निर्जल कैल्सियम-सल्फेट, कैल्सियम ऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड में अपघटित हो जाता है।

2. प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल से क्रिया कराने पर ऊष्मा उत्पन्न होती है और वह जल अवशोषित करके शीघ्रता से जिप्सम में बदलकर, जम जाता है। इस क्रिया को प्लास्टर ऑफ पेरिस का जमना (setting) कहते हैं।

प्लास्टर ऑफ पेरिस के उपयोग

टूटी हुई हड्डियों का प्लास्टर करने में।

प्रश्न:23 कास्टनर-कैलनर सेल विधि द्वारा कास्टिक सोडा का निर्माण किस प्रकार किया जाता है? सचित्र वर्णन कीजिए। इसके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर: कास्टनर-कैलनर सेल में स्लेट का बना हुआ एक टैंक होता है, जो स्लेट के विभाजकों द्वारा तीन भागों में बँटा रहता है। स्लेट के विभाजक पारे (Hg) से ढकी हुई टैंक की तली को स्पर्श करते हैं। टैंक के बाएँ तथा दाएँ कक्षों में NaCl का सान्द्र विलयन (ब्राइन) भरा जाता है तथा इन कक्षों में ग्रेफाइट ऐनोड लगे रहते हैं। बीच के कक्ष में जल भरा रहता है तथा लोहे की छड़ों का कैथोड लगा रहता है।

विद्युत धारा प्रवाहित करने पर, दाएँ तथा बाएँ कक्षों में ग्रेफाइट ऐनोड पर क्लोरीन मुक्त होती है। मर्करी कैथोड पर सोडियम अमलगम बनता है।

इस इलेक्ट्रोड पर Hg सोडियम से क्रिया करके अमलगम बनाती है।

सोडियम अमलगम सेल के बाएँ कक्ष के नीचे लगे विकेन्द्रित पहिये को घुमाकर सेल को इधर-उधर हिलाया जाता है। इस प्रकार, सोडियम-अमलेगम दाएँ वे बाएँ कक्षों से बीच के कक्ष में कर लेते हैं।

इसमें Na-Hg जल से क्रिया करके NaOH का निर्माण करता है और H, गैस मुक्त होती है। Hg को , छानकर पृथक् कर देते हैं।

2(Na-Hg) + 2H2O → 2NaOH + 2Hg ↓ + H2

सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन का वाष्पन करने से ठोस सोडियम हाइड्रॉक्साइड प्राप्त कर लेते हैं।

गन्धक के साथ क्रिया-हाइपो प्राप्त होता है।

उपयोग: साबुन बनाने में।

प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।

प्रश्न:24 अपचायक प्रकृति क्या है? 

उत्तर: अपचायक प्रकृति —प्रथम वर्ग की धातुओं के समान क्षारीय मृदा धातुएँ प्रबल अपचायक हैं। इसका बोध इनके अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव के मानों से होता है। यद्यपि इनकी अपचयन-क्षमता क्षार धातुओं की तुलना में कम होती है। बेरिलियम के अपचयन विभव का मान अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से कम ऋणात्मक होता है फिर भी इसकी अपचयन-क्षमता का कारण Be2+ आयन के छोटे आकार, इसकी उच्च जलयोजन ऊर्जा एवं धातु की उच्चं परमाण्वीयकरण एन्थैल्पी का होना है।

प्रश्न:25 लीथियम किस प्रकार मैग्नीशियम से रासायनिक गुणों में समानताएँ दर्शाता है?

उत्तर: लीथियम एवं मैग्नीशियम के रासायनिक गुणों में समानताएं

लीथियम एवं मैग्नीशियम के रासायनिक गुणों में समानता के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं-

लीथियम एवं मैग्नीशियम जल के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करते हैं। इनके ऑक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड बहुत.कम घुलनशील हैं। हाइड्रॉक्साइड गर्म करने पर विघटित हो जाते हैं। दोनों ही नाइट्रोजन से सीधे संयोग करके नाइट्राइडे क्रमश: Li3N एवं Mg3N2 बनाते हैं।

Li2O एवं MgO ऑक्सीजन के आधिक्य से अभिक्रिया करके सुपर ऑक्साइड नहीं बनाते हैं।

लीथियम एवं मैग्नीशियम धातुओं के कार्बोनेट गर्म करने पर सरलतापूर्वक विघटित होकर उनके ऑक्साइड एवं CO2 बनाते हैं। दोनों ही ठोस हाइड्रोजन कार्बोनेट नहीं बनाते हैं।

LiCl एवं MgCl2 एथेनॉल में विलेय हैं।

LiCl एवं MgCl2 दोनों ही प्रस्वेद्य (deliquescent) यौगिक हैं। ये जलीय विलयन से | LiCl.2H2O एवं MgCl2.8H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत होते हैं।