बिहार बोर्ड कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 14 पर्यावरण रसायन लघु उत्तरीय प्रश्न
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बिहार बोर्ड कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 14 पर्यावरण रसायन लघु उत्तरीय प्रश्न

ACGT

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.पर्यावरणीय रसायन शास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:पर्यावरणीय रसायन शास्त्र, विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें हमारे वातावरण पर रसायनों के परिणाम (जैसे-उत्पत्ति, परिवहन, अभिक्रियाएँ, प्रभाव तथा तथ्यों आदि) का अध्ययन किया जाता है।

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प्रश्न 2.ग्रीन हाऊस प्रभाव के कारण भूमण्डलीय ताप में वृद्धि हो रही है। ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिए कौन-से पदार्थ उत्तरदायी हैं?
उत्तर:ग्रीन हाऊस गैसें तथा कार्बनमोनोऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, ओजोन तथा क्लोरोफ्लु ओरोकार्बन ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिए उत्तरदायी हैं। ये गैसें पृथ्वी की सतह से जाने वाली विकिरणों को अवशोषित करके पृथ्वी का तापमान नियंत्रित करती हैं।।

प्रश्न 3.ओजोन एक विषैली गैस तथा प्रबल ऑक्सीकारक अभिकर्मक है फिर भी ऊपरी समतापमण्डल में इसकी उपस्थिति अति महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र से ओजोन को पूर्णतया हटा लिया जाए तो क्या होगा?
उत्तर:ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है जिसके कारण यह पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से जन-जीवन की रक्षा करती है। यदि ऊपरी समतापमण्डल से ओजोन को पूर्णतया हटा लिया जाए तो पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुँच जाएगी तथा अनेकों बीमारियाँ जैसेत्वचा झुलसना, त्वचा कैंसर आदि बीमारियाँ उत्पन्न हो जाएंगी।

प्रश्न 4.जल में विलेय ऑक्सीजन के स्रोत क्या हैं?
उत्तर:जल में विलेय ऑक्सीजन के स्रोत निम्न हैं –

प्रकाश-संश्लेषण

प्राकृतिक ऐरेशन

कृत्रिम ऐरेशन।

प्रश्न 5.जल में घुली हुई ऑक्सीजन जलीय जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। जल में घुली ऑक्सीजन की कमी के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी है?
उत्तर:जल में घुलित ऑक्सीजन की कमी के लिए, फॉस्फेटी तथा नाइट्रेट उर्वरकों, अपमार्जक, मानवजन्तु मल का बहाव तथा भोजन, कागज, लुग्दी उद्योगों द्वारा कार्बनिक अपशिष्टों आदि का जल में अत्यधिक उत्सर्जन है। सूक्ष्मजीव जो कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण करते हैं, वे भी जल में विलेय ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं। इसके साथ-साथ रात में प्रकाश-संश्लेषण तो रुक जाता है परन्तु जलीय जीव तथा पादप निरंतर श्वसन करते हैं, जिसके कारण जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आती है।

प्रश्न 6.जैवनिम्नीकृत तथा अजैवनिम्नीकृत प्रदूषक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:जैवनिम्नीकृत प्रदूषक-जीवाणुओं द्वारा अपघटित हो सकने वाले पदार्थ हैं। उदाहरण-मल, पशुओं का गोबर, फल-सब्जियों के छिलके आदि। अजैवनिम्नीकृत प्रदूषक-जीवाणुओं द्वारा अपघटित न हो सकने वाले पदार्थ हैं। उदाहरण-मर्करी, लेड, डी.डी.टी. काँच एवं प्लास्टिक आदि।

प्रश्न 7.प्रदूषण किसे कहते हैं?
उत्तर:संतुलित वातावरण में प्रत्येक घटक लगभग एक निश्चित मात्रा एवं अनुपात में रहता है। कभीकभी वातावरण में एक अथवा अनेक घटकों की मात्रा या तो आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है अथवा वातावरण में हानिकारक घटकों का प्रवेश हो जाता है जो जीवधारियों के लिये किसी-न-किसी रूप में हानिकारक सिद्ध होता है, प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 8.प्रदूषक किसे कहते हैं?
उत्तर:ऐसे पदार्थ जिनकी मात्रा पर्यावरण में आवश्यकता से अधिक होने लगे तथा एक सीमा से अधिक बढ़ जाने के कारण मानव को, प्राणी जगत को या वनस्पति जगत को नुकसान पहुँचाने लगे, वे प्रदूषक कहलाते हैं। ये पदार्थ मुख्य रूप से निम्नलिखित हो सकते हैं – CO , CO2 , NO , NO2 , SO इत्यादि।

प्रश्न 9.दूषक किसे कहते हैं?
उत्तर:कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, जो प्रकृति में तो नहीं पाये जाते किन्तु मानव द्वारा कृत्रिम रूप से निर्मित किये जाते हैं। ये पदार्थ नष्ट हुये बगैर पर्यावरण को दूषित करते हैं।

प्रश्न 10.ओजोन पर्त क्षरण के लिये उत्तरदायी गैसों या रसायन के नाम लिखिए।
उत्तर:ओजोन पर्त के क्षरण के लिये वायुमण्डल में उपस्थित नाइट्रिक ऑक्साइड, परमाणवीय ऑक्सीजन तथा क्लोरोफ्लुओरो कार्बन उत्तरदायी हैं।

प्रश्न 11.ग्रीन हाऊस गैसें क्या हैं?
उत्तर: CO2 ओजोन व जलवाष्प को ग्रीन हाऊस गैसें कहा जाता है। इनमें अवरक्त विकिरणों को अवशोषित करने का गुण होता है। अतः इन्हें ग्रीन हाऊस गैसें कहा जाता है।

प्रश्न 12.प्रदूषित वायु किसे कहते हैं?
उत्तर:यदि वायु में ऐसे पदार्थ उपस्थित हो जो जीवों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालें तो उस वायु को प्रदूषित वायु कहते हैं। प्रदूषित वायु में मुख्यत: CO2 , SO2 , SO3 ,CO निलम्बित अणु रहते हैं।

प्रश्न 13.अंटार्कटिका पर ही ओजोन का क्षय होता है, क्यों?
उत्तर:क्योंकि समतापमण्डल के दूसरे भागों में मुक्त क्लोरीन अणुओं में बदल जाते हैं, जबकि अंटार्कटिका पर उत्पन्न यौगिक क्लोरीन मुक्त मूलकों से घिर जाते हैं जिससे ओजोन का क्षय होता है।

प्रश्न 14. सल्फर डाइऑक्साइड का उत्प्रेरक की अनुपस्थिति में सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण एक मंद परिवर्तन है परन्तु इसका ऑक्सीकरण वायुमण्डल में शीघ्रता से होता है बताइये कि ऐसा क्यों होता है? SO2 में SO3 के परिवर्तन की रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर: SO2 से SO3  के ऑक्सीकरण में, प्रदूषित वायु में उपस्थित कणिकीय द्रव्य उत्प्रेरक की भाँति कार्य करते हैं।

प्रश्न 15. समतापमण्डल में ओजोन किस प्रकार निर्मित होती है?
उत्तर: समतापमण्डल में ओजोन पराबैंगनी विकिरणों की डाइऑक्सीजन (O2) अणु पर क्रिया से उत्पन्न होती है। पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणु को ऑक्सीजन परमाणु में अपघटित कर देती है। ये ऑक्सीजन परमाणु, ऑक्सीजन अणु के साथ संयुग्मित होकर ओजोन अणु बनाते हैं।

प्रश्न 16.प्राथमिक एवं द्वितीयक वायु प्रदूषक किसे कहते हैं?
उत्तर: प्राथमिक वायु प्रदूषक-जो वायु प्रदूषक प्राकृतिक या मानवीय कारणों से सीधे वायु को प्रदूषित करते हैं, प्राथमिक वायु प्रदूषक कहलाते हैं। जैसे – CO , NO , CO2 , SO2.
द्वितीयक वायु प्रदूषक-ऐसे वायु प्रदूषक जो वायुमण्डल में ही प्रदूषकों के बीच रासायनिक क्रियाओं से या गैसों तथा प्रदूषकों के बीच क्रियाओं से बनते हैं, उन्हें द्वितीयक प्रदूषक कहते हैं। जैसे –

प्रश्न 17. प्रकाश रासायनिक स्मॉग किसे कहते हैं?
उत्तर:स्मॉग का अर्थ धुएँ और कोहरे का सम्मिश्रण है जब इस स्मॉग में ऑक्सीकारकों की उच्च सान्द्रता उपस्थित हो तो इसे प्रकाश रासायनिक स्मॉग कहते हैं। धुआँ एक वायु प्रदूषक है जिसमें ईंधन पदार्थों के अपूर्ण दहन के कारण अनेक ठोस कण वायुमण्डल में निलम्बित रहते हैं। गैसीय माध्यम में अति सूक्ष्म आकार के ठोस कणों के विक्षेपण से उत्पन्न बादल को वायु विलय कहते हैं और धुएँ व कोहरे के संयोग से धुन्ध बनती है।

प्रश्न 18. अम्लीय वर्षा किसे कहते हैं?
उत्तर: वायु प्रदूषण के कारण वायुमण्डल में विभिन्न गैसों जैसे – CO2 , SO2 , SO3 , NO2. इत्यादि की सान्द्रता में वृद्धि होती है। ये विभिन्न गैसें वर्षा की बूंदों में अपनी-अपनी विलेयता के अनुसार विलेय होकर अम्ल बनाती हैं। वर्षा के रूप में गिरने वाली ये बूंदें ही अम्लीय वर्षा कहलाती हैं।

CO2+H2OH2CO3

SO3+H2OH2SO4

प्रश्न 19. CO2 कब प्रदूषक कहलाती है?
उत्तर: वायुमण्डल में CO2 की सामान्य मात्रा किसी प्रकार भी हानिकारक नहीं है। बल्कि जीव एवं पेड़-पौधे इससे अपने भोजन का निर्माण करते हैं। लेकिन जब विभिन्न प्रक्रियाओं के कारण जब वायुमण्डल में इसकी सान्द्रता आवश्यकता से अधिक हो जाती है तो प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ कर नुकसान पहुँचाती है।

प्रश्न 20. ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये कार्बन डाइऑक्साइड को अधिक उत्तरदायी समझा जाता है, क्यों?
उत्तर: जलवाष्प केवल पृथ्वी के अत्यधिक निकट पायी जाती है तथा ओजोन वायुमण्डल के ऊपरी भाग में पायी जाती है। इनकी तुलना में CO2 वायुमण्डल में समान रूप से सभी स्थान में पायी जाती है। इसलिये ग्रीन हाऊस प्रभाव के लिये CO2 अधिक उत्तरदायी है क्योंकि CO2 में सूर्य के अवरक्त प्रकाश की किरणों को अवशोषित करने की क्षमता होती है। इसके फलस्वरूप वातावरण में ग्रीन हाऊस प्रभाव उत्पन्न होता है।

प्रश्न 21. अम्ल वर्षा को ताजमहल के लिए हानिकारक माना जाता है, क्यों?
उत्तर: ताजमहल संगमरमर (CaCO3) से बना है। अम्लीय वर्षा में H2SO4 होता है, जो बहुत ही तनु अवस्था में होता है, जो संगमरमर से क्रिया करता है। अतः संगमरमर धीरे-धीरे क्षय हो जाता है।

CaCO3 (aq)+H2SO4(aq)CaSO4 (aq)+CO2 (g)+H2O (I)

प्रश्न 22. फ्लाई ऐश प्रदूषण किसे कहते हैं?
उत्तर: कोल में उपस्थित लाइम स्टोन राख में CaO के रूप में रहता है तथा राख के साथ धूल में उड़ सकता है। वातावरण में स्थित H2SO4 की सूक्ष्म बूंदें CaO से क्रिया कर CaSO4 के कण बना देती है। हवा में उपस्थित अमोनिया भी H2SO4  के साथ क्रिया कर (NH4)2SO4 के कणों में बदल जाता है। राख का हवा के साथ उड़कर प्रदूषण उत्पन्न करना फ्लाई ऐश प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 23. संक्रमित जल किसे कहते हैं? संक्रमित जल से होने वाली बीमारियों के नाम लिखिए।
उत्तर: वह जल जिसमें प्रदूषण के कारण जीवों के विविध हानिकारक पदार्थ तथा सूक्ष्म जीव उपस्थित हैं, संक्रमित जल कहलाता है। संक्रमित जल से होने वाली बीमारियाँ निम्नलिखित हैं –

(1) हैजा

(2) पीलिया

(3) पेचिश

(4) चर्म रोग।

प्रश्न 24. ग्लोबल वॉर्मिंग से क्या समझते हो?
उत्तर: CO2 मेथेन, क्लोरो फ्लुओरो कार्बन आदि गैसों की वायुमण्डल में अधिक मात्रा में उपस्थिति के कारण सूर्य की गर्मी रुक जाने से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि ग्लोबल वॉर्मिंग कहलाती है। ग्लोबल वॉर्मिंग ग्रीन हाऊस का दुष्परिणाम है।

प्रश्न 25. आयनोस्फीयर किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह से 50 से 90 कि.मी. की ऊँचाई तक लगभग 40 कि.मी. की मोटाई वाली पर्त मेसोस्फीयर कहलाती है। इस क्षेत्र में सभी गैसें आयनित अवस्था में रहती हैं इसलिये इसे आयनोस्फीयर भी कहते हैं।

O2+O+ O2++O

O++N2NO+ + N

N2++O2N2+O2+