बिहार बोर्ड कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 5 द्रव्य की अवस्थाएँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न:1 गैसों के भौतिक लक्षण बताइये l
उत्तर: 1.ठोसों और तरल पदार्थों की तुलना में गैसों का घनत्व कम होता है और अत्यधिक संकुचित होती हैं।
2. वे सभी दिशाओं में समान मात्रा में दबाव डालते हैं।
3. गैस कणों के बीच बहुत अधिक स्थान होता है, और उनमें उच्च गतिज ऊर्जा होती है।
4. इंटरमॉलिक्युलर फोर्सइन गैस कणों के बीच
5. ये कण सभी दिशाओं में उच्च गति से चलते हैं और एक दूसरे से टकराते हैं, जिससे गैस पूरे कंटेनर में समान रूप से फैल जाती है। इससे उन्हें कंटेनर की दीवारों पर दबाव भी पड़ता है।
6.अत: गैसें पात्र का आयतन और आकार ग्रहण कर लेती हैं।
प्रश्न:2 गैसीय अवस्था के गुण, नियम एवं विशेषताएँ
उत्तर: पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएँ होती है-ठोस, द्रव तथा गैस। आधुनिक अनुसन्धानों द्वारा एक अवस्था और ज्ञात की गयी है जिसे प्लाज्मा कहते है। ताप तथा दाब की परिस्थितियों के अनुसार पदार्थ एक समय में किसी एक भौतिक अवस्था में पाया जाता है। इन तीनों अवस्थाओं में कोई सुस्पष्ट सीमांकन रेखा नहीं होती, किसी भी पदार्थ का ताप, दाब आदि परिवतर्न करके उसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदला जा सकता है। उदाहरणार्थ- जल की तीन अवस्थाएँ होती हैं, जिन्हें केवल ताप परिवर्तन से एक-दूसरे में परिवर्तित किया जा सकता है।
बर्फ (ठोस) > 00C जल (द्रव) > 1000C जल-वाष्प (गैस)
प्रश्न:3 क्रान्तिक दाब तथा क्रान्तिक आयतन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: क्रान्तिक दाब–किसी गैस को क्रान्तिक ताप पर द्रवित करने के लिए जिस न्यूनतम दाब की आवश्यकता होती है वह उस गैस का क्रान्तिक दाब कउत्तराता है। इसे Pe से प्रदर्शित करते हैं। क्रान्तिक ताप जितना कम होता है क्रान्तिक दाब भी उतना ही कम होता है।
क्रान्तिक आयतन–क्रान्तिक दाब तथा क्रान्तिक ताप पर किसी गैस के 1 मोल का आयतन उसका ” क्रान्तिक आयतन कउत्तराता है। इसे Vc द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
प्रश्न:4 आदर्श गैस से आप क्या समझते हैं? गैस के किसी एक मोल के लिए आदर्श गैस समीकरण लिखिए।
उत्तर: जो गैस ताप व दाब की सभी परिस्थितियों में बॉयल एवं चार्ल्स के नियम का तथा आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है, उसे आदर्श गैस कहते हैं।
1 मोल गैस के लिए आदर्श गैस समीकरण इस प्रकार होगी
PV =nRT
यदि n = 1 मोल हो, तो
PV = RT
जहाँ, P = दाब, V = आयतन, R = सार्वत्रिक गैस स्थिरांक, T = परमताप
प्रश्न:5 जल की तुलना में ग्लिसरीन धीरे-धीरे बहती है, क्यों?
उत्तर: किसी द्रव के बहने का गुण द्रव की प्रकृति पर निर्भर करता है, क्योंकि द्रव के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बलों का मान उच्च होने पर श्यानता का मान भी उच्च होता है जिससे बहने की दर कम हो जाती है। ग्लिसरीन के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बल का मान जल के अणुओं के मध्य अन्तराणविक आकर्षण बल के मान से उच्च होता है अर्थात् ग्लिसरीन की श्यानता जल की श्यानता की तुलना में अधिक होती है।
प्रश्न:6 द्रव की श्यानता पर ताप तथा दाब के प्रभाव को समझाइए।
उत्तर: 1. द्रव की श्यानता पर ताप परिवर्तन का प्रभाव–ताप बढ़ाने पर द्रव की श्यानता का मान घटता है क्योंकि ताप बढ़ाने पर द्रव के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा बढ़ती है जिससे अन्तराणविक आकर्षण बल का मान कम हो जाता है।
2. द्रव की श्यानता पर दाब परिवर्तन का प्रभाव-दाब बढ़ाने पर द्रव के अणु निकट आ जाते हैं। ” जिसके कारण अन्तराणविक आकर्षण बल का मान बढ़ जाता है जिससे श्यानता बढ़ जाती है।
प्रश्न:7 गैसों के अणुगति सिद्धान्त के अभिगृहितों की व्याख्या कीजिये।
उत्तर: गैसों की अणुगति सिद्धान्त की परिकल्पनायें
गैसों के विभिन्न भौतिक गुणों की गैसों के अणुगति सिद्धान्त से व्याख्या करने के लिये निम्न परिकल्पनायें ली जाती हैं
एक गैस के सभी अणु आकार तथा द्रव्यमान में समान और वे पूर्णतः प्रत्यास्थ होते हैं।
गैस के अणुओं का आयतन गैस के आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
गैस के अणुओं का वेग (0, -∞ ) के बीच होता है तथा वे हर सम्भव वेग से हर सम्भव दिशा में गतिमान रहते हैं। गैस का ताप अणुओं की गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है।
गैस के अणुओं के बीच टक्कर पूर्णतया प्रत्यास्थ होती है। तथा अणुओं की टक्कर में लगा समय नगण्य होता है। इसकी कोटि 10-8 सेकण्ड होती है।
टक्कर से पूर्व सीधी रेखा में अणु द्वारा तय की गई दूरी को मुक्त पथ कहते हैं तथा निश्चित टक्करों के बाद माध्य तय की गई दूरी को औसत मुक्त पथ कहते हैं।
अणुओं के बीच कोई आकर्षण तथा प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता है।
गैस के अणुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल प्रभावी नहीं होता है। क्योंकि अणुओं का द्रव्यमान सूक्ष्म तथा वेग अधिक होता है।
प्रश्न:8 शीत ऋतु में झील में बर्फ की पर्त जम जाती है लेकिन उसमें उपस्थित मछली तथा जीवजन्तु जीवित रहते हैं, क्यों?
उत्तर: जल का अधिकतम घनत्व 4°C ताप पर होता है किन्तु 4°C से कम ताप पर घनत्व कम होता है। जब झील का ताप गिरता है तो ऊपर के पृष्ठ का जल अधिक सघन हो जाता है और वह नीचे चला जाता है। यह क्रम तब तक चलता रहता है जब तक कि ताप 4°C तक नहीं पहुँच जाता है। पृष्ठ का ताप यदि 4°C से कम हो तो जल ऊपर की सतह पर ही रहता है और धीरे-धीरे बर्फ में बदल जाता है जबकि नीचे का जल अधिक घनत्व के कारण नीचे ही रहता है और द्रव अवस्था में ही रहता है इसलिये जीव जन्तु तथा मछली इसमें जीवित रहते हैं।
प्रश्न:9 द्रवों में विसरण की दर मंद होती है, क्यों?
उत्तर: द्रव में अणुओं के मध्य अंतरअणुक आकर्षण बल गैस की तुलना में अधिक होता है तथा इसके अणु एक-दूसरे के साथ इस अंतरअणुक आकर्षण बल के द्वारा गैस की तुलना में दृढ़ता से बँधे रहते हैं । इसलिये द्रव के अणु गैस के अणुओं के समान स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते इसलिये द्रव में विसरण की दर गैस की तुलना में मंद होती है।
प्रश्न:10 S.T.P. व N.T.P. से क्या समझते हो?
उत्तर: गैस की निश्चित मात्रा का आयतन, ताप व दाब के साथ परिवर्तित होता है अर्थात् गैसों के गुण ताप तथा दाब पर निर्भर करते हैं इसलिये विभिन्न गैस के गुणों की तुलना एक निश्चित ताप एवं दाब पर की जा सकती है। इसके लिये 0°C (273 K) ताप तथा एक वायुमण्डलीय दाब (760 mm) को चुना गया है जिसे सामान्य ताप व दाब या N.T.P. कहते हैं N.T.P. पर एक मोल गैस का आयतन 224 लिटर होता है तथा 25°C (298 K) ताप तथा 1 वायुमण्डलीय दाब (760 mm) या 1 बार दाब को मानक ताप व दाब कहते हैं। S.T.P. पर एक मोल गैस का आयतन 22-4 लीटर होता है।
प्रश्न:11 बॉयल का नियम क्या है ? इसका गणितीय व्यंजक लिखिए।
उत्तर: इस नियम के अनुसार, “स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन (V) उसके दाब (P) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
⇒ PV = स्थिरांक
अतः स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा के आयतन तथा दाब का गुणनफल सदैव एक स्थिरांक होता है।
प्रारंभिक स्थिति में,
P1V1 = K. ………(1)
अंतिम स्थिति में,
P2V2 = K ………(2)
समीकरण (1) और (2) से,
P1V1 = P2V2
प्रश्न:12 किसी द्रव के ताप में वृद्धि का, अणुओं के मध्य लगने वाले अंतर-आण्विक बलों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? किसी द्रव के ताप में वृद्धि का इसकी श्यानता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: किसी द्रव का ताप बढ़ाने पर, अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है जिसके कारण अंतराण्विक बलों का मान घट जाता है। अत: द्रव सरलता से बह सकता है जिसके कारण द्रव की श्यानता घट जाती है।
प्रश्न:13 डॉल्टन का आंशिक दाब का नियम क्या है ?
उत्तर: आपस में क्रिया न करने वाली गैसों के मिश्रण के दाब के लिये डॉल्टन ने गैसों का आंशिक दाब का नियम प्रतिपादित किया जिसके अनुसार-“एक निश्चित ताप पर किसी निश्चित आयतन वाले पात्र में दो या दो से अधिक अक्रिय गैसों का मिश्रण लिया जाये तो मिश्रण का कुल दाब गैसों के आंशिक दाब के योग के बराबर होता है। यदि गैसों के मिश्रण का संयुक्त दाब P है तथा इसी ताप पर अवयवी गैसों का आंशिक दाब क्रमश: P1P2 तथा P3 हो, तो
P = P1 + P2+ P3.
नियम का उपयोग:
प्रयोगशाला में गैसें प्रायः जल के ऊपर एकत्रित की जाती हैं, जिनमें नमी उपस्थित रहती है। इस नियम के आधार पर शुष्क गैस का दाब = नम गैस का दाब – जल का वाष्प दाब।
प्रश्न:14 ग्राहम के विसरण नियम के विभिन्न अनुप्रयोग लिखिये।
उत्तर: 1.गैस का घनत्व तथा अणुभार ज्ञात करने में – यदि एक गैस के विसरण का समय तथा घनत्व ज्ञात हो तथा दूसरी गैस के विसरण का समय ज्ञात हो तो इसकी सहायता से दूसरी गैस का घनत्व तथा अणुभार ज्ञात किया जा सकता है।
2. मार्श गैस सूचक – खान में काम करने वाले व्यक्ति इस सूचक की सहायता से विषैली गैसों के रिसाव से सचेत हो जाते हैं।
3. गैसों के पृथक्करण में – गैसों की विसरण की दर में भिन्नता होने के कारण उन्हें उनके मिश्रण से सरलता से पृथक् किया जा सकता है।
4.दुर्गन्ध – दुर्गन्ध और विषैली गैस वायु में विसरित होने के कारण पृथक् होती रहती है।
प्रश्न:15 काँच के तीक्ष्ण किनारे को ज्वाला में इसके गलनांक तक गर्म करने पर यह चिकना क्यों हो जाता है ? इसके लिए उत्तरदायी द्रव के गुण का नाम लिखिए।
उत्तर:तीक्ष्ण किनारे वाले काँच को ज्वाला में गर्म करके चिकना बनाया जाता है। क्योंकि गर्म करने पर, काँच पिघलता है तथा द्रव का किनारा गोल आकृति लेने का प्रयास करता है जिसका पृष्ठ तनाव न्यूनतम होता है। इसे काँच का ‘अग्नि-चकास’ कहते हैं।
प्रश्न:16 आदर्श गैस किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर: आदर्श गैस या वास्तविक गैस:
वह गैस जो गैस नियमों का या गैस समीकरण का प्रत्येक दाब व ताप पर दृढ़ता से पालन करती है तो उसे आदर्श गैस कहते हैं।
विशेषताएँ:
1. स्थिर ताप पर गैस के दाब व आयतन का गुणनफल सदैव स्थिर होना चाहिये तथा स्थिर ताप पर PV तथा P के मध्य खींचा गया ग्राफ एक क्षैतिज रेखा होनी चाहिये।
2. यदि आदर्श गैस को स्थिर दाब पर ठण्डा किया जाये तो इसका आयतन लगातार घटना चाहिये और -273°C ताप पर शून्य होना चाहिये।
3.बिना बाहरी कार्य के इसके प्रसार या संकुचन में कोई ऊष्मीय प्रभाव नहीं होना चाहिये। (4) आदर्श गैस का संपीड्यता गुणांक Z = PV का मान 1 होता है।
प्रश्न:17 वास्तविक गैस क्या है ? इसकी विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर: वे गैसें जो बॉयल नियम, चार्ल्स नियम तथा आदर्श गैस समीकरण का दृढ़ता से पालन नहीं करतीं, वास्तविक गैस कहलाती हैं।
विशेषताएँ:
1. गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल नगण्य होता है।
2. गैस के कुल आयतन की तुलना में एक अणु के आयतन को नगण्य नहीं माना जा सकता है।
3. -273°C पर इनका आयतन शून्य नहीं होता क्योंकि अधिकांश गैसें ठण्डा करने पर इससे पहले ही द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाती हैं।
4. न्यून ताप व उच्च दाब पर गैसें बॉयल तथा चार्ल्स नियम का पालन नहीं करती हैं।
प्रश्न:18 आदर्श गैस तथा वास्तविक गैस में अंतर लिखिये।
उत्तर: आदर्श गैस तथा वास्तविक गैस में अंतर –
आदर्श गैस:
1. आदर्श गैस, आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है।
2. गैस के अणुओं का आयतन पात्र की तुलना में में नगण्य होता है।
3. गैस के अणुओं में परस्पर आकर्षण नहीं होता है।
4. किसी आदर्श गैस का अस्तित्व नहीं है।
5. आदर्श गैसों के लिये संपीड्यता गुणांक का मान 1 होता है।
वास्तविक गैस:
1. वाास्तविक गैस निम्न दाब और उच्च ताप पर ही आदर्श गैस समीकरण का पालन करती है।
2. गैस के अणुओं का आयतन पात्र की तुलना में नगण्य नहीं होता है।
3. अणुओं के मध्य आकर्षण होता है।
4. सभी गैसें वास्तविक गैसें हैं तथा वे आदर्श गैसों के व्यवहार से कभी धनात्मक तथा कभी ऋणात्मक विचलन दर्शाती हैं।
5. वास्तविक गैसों के लिये सम्पीड्यता गुणांक का मान 1 नहीं होता है।
प्रश्न:19 अणुगतिक सिद्धान्त के आधार पर बॉयल के नियम को समझाइये।
उत्तर: किसी भी गैस का दाब उसके अणुओं के पात्र की दीवारों से टकराने के कारण उत्पन्न होता है। अर्थात् दाब का परिमाण टक्करों की आवृत्ति पर निर्भर करता है तथा टक्करों की आवृत्ति अणुओं की संख्या तथा उनके वेग पर निर्भर करती है। यदि गैस का आयतन कम कर दिया जाये तो इकाई आयतन में उपस्थित अणुओं की संख्या बढ़ जायेगी, जिसके फलस्वरूप इकाई समय में दीवार की इकाई क्षेत्रफल पर टकराने वाले अणुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी, जिसके कारण दाब में भी वृद्धि होगी।
दूसरी तरफ यदि आयतन में वृद्धि कर दी जाये तो इकाई क्षेत्रफल में उपस्थित अणुओं की संख्या में कमी आयेगी, जिससे इकाई समय में दीवार की इकाई क्षेत्रफल पर होने वाली टक्करों की संख्या में कमी आयेगी, जिससे दाब में भी कमी आयेगी। अतः स्पष्ट है स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
प्रश्न:20 गैसों के अणुगतिक समीकरण की सहायता से चार्ल्स के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: गैस का ताप बढ़ाने पर उसकी गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है जिसके फलस्वरूप अणुओं के वेग में वृद्धि होती है और वेग में वृद्धि के कारण अणुओं के मध्य होने वाली टक्करों की संभावना में वृद्धि होती है। जिस बल से वे टकराते हैं उसमें वृद्धि होने लगती है जिसके फलस्वरूप दाब में वृद्धि होने लगती है।
यदि दाब को स्थिर रखना है तो यह जरूरी है कि अणुओं के मध्य होने वाली टक्करों की संभावना में वृद्धि न हो। यह तभी संभव है जब गैस के अणुओं के बीच की दूरी में वृद्धि कर दी जाये अर्थात् आयतन में वृद्धि की जाये । इससे स्पष्ट है कि स्थिर दाब पर गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती है।
प्रश्न:21 श्यानता या विस्कासिता से आप क्या समझते हैं ? श्यानता को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर: प्रत्येक द्रव में बहने की एक प्रवृत्ति होती है क्योंकि द्रव में अन्तरअणुक आकर्षण बल कम होता है और ये असंपीड्य होते हैं। कुछ द्रव जैसे-शहद, कैस्ट्रॉल तेल अत्यन्त धीमी गति से प्रवाहित होते हैं जबकि कुछ द्रव जैसे-जल, कैरोसीन आदि में बहने की प्रवृत्ति अधिक होती है। प्रवाह की गति में भिन्नता श्यानता के कारण होती है।
श्यानता वास्तव में द्रव के प्रवाह पर प्रतिरोध है और यह प्रतिरोध अंतरअणुक आकर्षण बल द्वारा प्रभावित होता है। द्रवों को कई पर्तों से मिलकर बना हुआ समझा जाता है। जब कोई द्रव किसी भी सतह पर बहता है ये पर्ते भिन्न-भिन्न वेग से बहती हैं । द्रव की विभिन्न पर्तों में उपस्थित अणु एक-दूसरे द्वारा आकर्षित होते हैं और ये अंतरअणुक आकर्षण बल द्रव के प्रवाह पर प्रतिरोध उत्पन्न करता है।
श्यानता को प्रभावित करने वाले कारक –
1. अंतराअणुक आकर्षण बल – अंतरअणुक आकर्षण बल द्रव में अणुओं के प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं । इसलिये अंतरअणुक आकर्षण बल पर श्यानता निर्भर करती है।
2. अणुभार – अणुभार बढ़ने पर श्यानता बढ़ती है।
3. दाब – दाब बढ़ने पर आयतन में कमी आती है जिसके फलस्वरूप अंतर अणुक आकर्षण बल में वृद्धि होती है इसलिये दाब में वृद्धि करने से श्यानता में वृद्धि होती है।
4. ताप – ताप में वृद्धि करने से द्रव के प्रवाह को अवरुद्ध करने वाला ससंजक बल कम हो जाता है जिससे आण्विक गति में वृद्धि होती है। अतः श्यानता में कमी आती है।
प्रश्न:22 गैसीय अवस्था एवं गैसो के गुण के बारे मे बताइये l
उत्तर: पदार्थ की तीन भौतिक अवस्थाएँ होती है-ठोस, द्रव तथा गैस। आधुनिक अनुसन्धानों द्वारा एक अवस्था और ज्ञात की गयी है जिसे प्लाज्मा कहते है। ताप तथा दाब की परिस्थितियों के अनुसार पदार्थ एक समय में किसी एक भौतिक अवस्था में पाया जाता है। इन तीनों अवस्थाओं में कोई सुस्पष्ट सीमांकन रेखा नहीं होती, किसी भी पदार्थ का ताप, दाब आदि परिवतर्न करके उसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदला जा सकता है। उदाहरणार्थ- जल की तीन अवस्थाएँ होती हैं, जिन्हें केवल ताप परिवर्तन से एक-दूसरे में परिवर्तित किया जा सकता है।
बर्फ (ठोस) > 00C जल (द्रव) > 1000C जल-वाष्प (गैस)
प्रश्न 23. पृष्ठ तनाव किसे कहते हैं?
उत्तर: द्रव की सतह पर खींची गई एक रेखा की एकांक लम्बाई पर लगने वाले लम्बवत् बल को पृष्ठ तनाव कहते हैं। इसकी इकाई Kg s-2 तथा SI मात्रक में Nm-1 होती है। किसी द्रव की निम्नतम ऊर्जा स्तर तब होता है जब उसका पृष्ठ क्षेत्रफल न्यूनतम हो। किसी द्रव के पृष्ठ क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि करने के लिए आवश्यक ऊर्जा को पृष्ठीय ऊर्जा कहते हैं। इसकी इकाई Jm-2 होती है।
प्रश्न:24 CO2 एवं CH4 गैसों के क्रान्तिक ताप क्रमशः 31.1°C तथा – 81.9°C हैं। दोनों में से किसमें प्रबल अन्तराण्विक बल है एवं क्यों?
उत्तर:
गैस का क्रान्तिक ताप जितना अधिक होता है उसक द्रवीकरण उतना ही आसानी से होता है अर्थात् अणुओं में अन्तराअणुक आकर्षण बल प्रबल होगा चूँकि CO2 का क्रान्तिक ताप (31.1°C) CH4 के क्रान्तिक ताप (- 81.9°C) से अधिक है अत: CO2 में अणुओं के मध्य आकर्षण बल CH4 से अधिक है। यद्यपि CO2 तथा CH4 दोनों ही अध्रुवीय हैं लेकिन CO2 का मोलर द्रव्यमान CH4 से अधिक होने के कारण इसके अणुओं के मध्य आकर्षण बल अधिक होता है।
प्रश्न:25 ऑक्सीजन गैस के एक नमूने का आयतन 225 mL है जब इसका दाब 1.12 atm है। यदि तापमान स्थिर रहता है तो गैस का आयतन 0.98 एटीएम के दबाव में क्या होगा?
उत्तर: दिया
प्रारंभिक मात्रा (वी 1 ) = 225 एमएल
प्रारंभिक दबाव (पी 1 ) = 1.12 एटीएम
अंतिम दबाव (पी 2 ) = 0.98 एटीएम
अंतिम आयतन (V 2 ) = ?
हम बॉयल के नियम का उपयोग करके गैस की अंतिम मात्रा की गणना कर सकते हैं।
पी 1 वी 1 = पी 2 वी 2
1.12 X 225 = 0.98 XV 2
252 = 0.98 XV 2
252 / 0.98 = वी 2
वी 2 = 257.14 एमएल ≈ 257 एमएल
इसलिए 0.98 एटीएम के दबाव में गैस का अंतिम आयतन 257 एमएल के बराबर है।